भ्रष्ट अफसरों को भेज देता जेल, दवा उद्योग की गिरती साख पर शांता कुमार ने जताई चिंता

प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने हिमाचल के दवा उद्योग की गिरती साख पर चिंता जताते हुए कहा कि केंद्र और हिमाचल सरकार दवा उद्योग में हिमाचल को अग्रणी बनाने की कोशिश कर रही है, परंतु भ्रष्टाचारी तंत्र पूरी दुनिया में भारत के दवा उद्योग को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कई वर्षों से भारत दवा निर्माण में विश्व में अग्रणी है। भारत को दुनिया की फार्मेसी कहा जाता है। करोड़ों रुपए की दवाइयां निर्यात होती हैं। देश में बनने वाली दवाइयों की 40 प्रतिशत दवाइयां हिमाचल के बद्दी-बरोटीवाला क्षेत्र में बनती हैं।

अब यहीं पर बल्क ड्राग पार्क बनाने की योजना बनी है। इसके बनने से दवा उद्योग में हिमाचल विश्व में ऊंचे स्थान पर पहुंचेगा। हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा। शांता ने कहा हिमाचल में नकली दवाई बनाने वाला उद्योग लगता है। उसे कच्चा माल मिलता है, लाइसेंस नहीं होता, लेकिन फैक्टरी बन जाती है। बिजली, पानी भी मिल जाता है। दवाइयां बनती हैं और बाहर जाती हैं तथा बिकती हैं। जब कोई मरता है तो शोर मचता है। इसमें सबसे अधिक जिम्मेदार सरकार के वह अधिकारी हैं जिनको मौके पर इन सब अवैध गतिविधियों को पकडऩा था। हिमाचल के दवा उद्योग की कहानी सोच कर लगता है न सरकार है न कहीं कानून है। उन्होंने कहा अगर मेरे बस में होता तो कार्रवाई करने की जिम्मेदारी वाले उन भ्रष्ट अधिकारियों को सबसे पहले जेल में डालता जिन्होंने भ्रष्टाचार के कारण ठीक समय पर ईमानदारी से ठीक कार्रवाई नहीं की।

धन के पागलपन में बचाए जा रहे अपराधी

पिछले दस वर्षों से हिमाचल के बढ़ते दवा उद्योग की खबरें आ रही हैं। साथ ही ऐसी खबरें भी लगातार आ रही हैं कि हिमाचल में बनी दवाइयां फेल हो रही हैं, परंतु आज तक एक यह भी भी समाचार नहीं आया कि ऐसे किसी व्यक्ति को पकड़ा गया हो, सजा दी गई हो और जेल में डाला गया हो। धन के पागलपन में दवाइयों में जहर मिलाया जाता है और धन के पागलपन में भ्रष्टाचार के द्वारा अपराधियों को बचाया जा रहा है।

दवा में जहर डालते भ्रष्टाचारियों को शर्म नहीं आती

शांता ने कहा देश का दुर्भाग्य है कि पैसे के पागलपन में ईमानदारी और नैतिकता समाप्त होती जा रही है। दवा में भी जहर डालते समय भ्रष्टाचारियों को शर्म नहीं आती। न भगवान का डर है न सरकार का डर है। उन्होंने कहा लगभग तीन साल पहले ऊधमपुर में हिमाचल की बनी दवाई से 12 बच्चे मारे गए थे। कुछ दिन अखबारों में खबर आई। सरकार ने हलचल दिखाई, परंतु आज तक कुछ भी नहीं हुआ। न कोई चार्जशीट बनी और न न ही कोई गिरफ्तारी हुई बल्कि फिर से लाइसेंस दे दिया और काम शुरू हो गया।

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